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Object Oriented Programming Language


Post by Avadhesh Parashar, 15-10-2019.

ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर डिजाइन करने का वह तरीका है जिसमें पूरे सॉफ्टवेयर डिज़ाइन को ऑब्जेक्ट और क्लास में बांट दिया जाता है जबकि स्ट्रक्चर प्रोग्राम जैसे की सी प्रोग्रामिंग में पूरा सॉफ्टवेयर फंक्शन(function) के रूप में बांटा हुआ होता है एक छोटा प्रोग्राम बनाने के लिए स्ट्रक्चर प्रोग्रामिंग का डिजाइन सही है लेकिन एक बहुत बड़े प्रोग्राम जिसमें हजारों लाइन के कोड होंगे उसके लिए स्ट्रक्चर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का डिजाइन सही नहीं होगा क्योंकि बहुत सारे फंक्शन(function) का एक प्रोग्राम में मौजूद होने की वजह से अगर कहीं कोई गलती होता है तो उस गलती को ढूंढना और गलती को ठीक करना बहुत मुश्किल का काम हो जाता है इसी कारण ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग का डिजाइन बहुत बड़े-बड़े सॉफ्टवेयर बनाने में उपयोग किया जाता है क्योंकि चाहे प्रोग्राम कितना भी बड़ा हो पूरा प्रोग्राम क्लास और ऑब्जेक्ट में बटा होता है और क्लास और ऑब्जेक्ट की मदद से एक ही कोड को बार-बार काम में लाया जा सकता है तथा कोई गलती होने पर भी सिर्फ जिस क्लास में गलती हुई है उसी क्लास के कोड को ठीक करके समस्या का समाधान किया जा सकता है । इसके दो फायदे हैं सबसे पहला तो यह कि क्लास और ऑब्जेक्ट की मदद से एक ही कोड को बार-बार काम में लिया जा सकता है जिससे प्रोग्राम का साइज छोटा हो जाता है और दूसरा यह कि प्रोग्राम में हुए गलतियों को ढूंढना बहुत आसान हो जाता है क्योंकि जिस क्लास में गलती हुई है हम सिर्फ उसी क्लास के गलती को ठीक कर के पूरे प्रोग्राम को गलतियों से मुक्त कर सकते हैं। इसके अलावा ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग क्लास और ऑब्जेक्ट में बंटे होने के कारण कोड की जटिलता कम हो जाती है जिससे ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग को समझना और पढ़ना बहुत आसान हो जाता है। (NOTE:- दोस्तों ऐसा हो सकता है कि अभी आप ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग को ठीक से नहीं समझ पा रहे हैं तो आप घबराइए नहीं क्योंकि जब आप प्रैक्टिकल प्रोग्राम बनाना शुरू करेंगे तब आप इस विषय को बहुत अच्छे से समझ पाएंगे|) ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (object oriented programming Language/ OOP) और प्रोसेड्यूरॉल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (procedural programming language/PPL) के मुख्य अंतर इस प्रकार है:- 1. ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग बॉटम अप अप्रोच (bottom up approach) को फॉलो करता है जबकि प्रोसेड्यूरॉल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज टॉप डाउन अप्रोच (top down approach) को फॉलो करता है| इसका मतलब यह है कि ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में सॉफ्टवेयर को बनाने का दृष्टिकोण नीचे से ऊपर की ओर होता है जबकि प्रोसेड्यूरॉल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में सॉफ्टवेयर को बनाने का दृष्टिकोण ऊपर से नीचे की ओर होता है| 2. ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग एन्कैप्सुलेशन(Encapsulation) , डाटा एब्सट्रेक्शन(Data-abstraction), इनहेरिटेंस(Inheritance) , पॉलीमॉरफिस्म(Polymorphism) , मैसेज पासिंग (Message passing ), डाटा हाइडिंग(Data hiding) , मल्टीथ्रेडइंग (Multithreading),ऑब्जेक्ट(object) ,क्लास(class) आदि की सुविधा प्रदान करता है जबकि प्रोसेड्यूरॉल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इन सुविधाओं को प्रदान नहीं करता| 3. OOP भाषाओं की सूची इस प्रकार हैं – C++, JAVA, VB.NET, C#.NET PPL भाषाओं की सूची इस प्रकार हैं – C, VB, Perl, Basic, FORTRAN 4. ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में काम कैसे होगा इसके बजाय डेटा के ऊपर ध्यान दिया जाता है जिससे प्रोग्रामर को प्रोग्राम बनाने में काफी सुविधा मिलती है जबकि प्रोसेड्यूरॉल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में काम कैसे होगा इस पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है ना कि डाटा के ऊपर इसलिए प्रोसेड्यूरॉल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में प्रोग्राम बनाना ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के तुलना में ज्यादा मुश्किल है | 5. ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में प्रोग्राम का आधारऑब्जेक्ट होता है जबकि प्रोसीजर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में प्रोग्राम का आधारफंक्शन होता है| Python Programming Language अगर आपने पहले किसी प्रोग्रामिंग भाषा को नहीं पढ़ा है तो आप पाइथन से अपनी सुरुआत कर सकते है । पाइथॉन बहुत ही बढ़िया प्रोग्रामिंग भाषा है और इस को सीखना बहुत ही आसान है । पाइथॉन प्रोग्रामिंग को शीख कर आप वेबसाइट , गेम और गूगल जैसा सर्च इंजन भी बना सकते है । Python का इतिहास – Python को Guido van Rossum (गुइडो वान रोससुम) द्वारा 1985- 1990 के दौरान नीदरलैंड्स( Netherlands ) में बनाया गया था | पाइथन का पहला संस्करण January 1994 में निकाला गया था दूसरा संस्करण October 16, 2000 में तीसरा संस्करण December 3, 2008 में निकल गया था । अभी पाइथन का 3.6 संस्करण (versions) चल रहा है जिसे December 23, 2016 में निकाला गया था । पाइथन को पढने या पाइथन का उपयोग करने के लिए हमें कोई लइसेंस नहीं लेना पड़ता है और न ही कोई कीमत चुकाना पड़ता है क्योंकि पाइथन जनरल पब्लिक लाइसेंस (जीपीएल) [General Public License (GPL)] के अंतरगत उपलब्ध है जीएनयू जनरल पब्लिक लाइसेंस एक व्यापक रूप से इस्तेमाल होने बाला मुफ्त सॉफ्टवेयर लाइसेंस है, जो उपयोगकर्ताओं को सॉफ्टवेयर चलाने,पढने और संशोधित करने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। PYTHON की विशेषता :- 1. पाइथन के साथ किसी भी डेटाबेस का उपयोग करना बहुत आसान है इसके आलावा दूसरे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे C, C++ के साथ पाइथन को जोड़ना भी बहुत आसान है । 2. पाइथन को scripting language जैसे PHP की तरह उपयोग करके एक डायनामिक वेबसाइट बनाने में इसका उपयोग किया जा सकता है । इसके अलवा पाइथन को compile करके C, C++ जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की तरह भी इसका उपयोग किया जा सकता है । 3. इस समय अमेरिका जैसे देश में डायनामिक वेबसाइट बनाने के लिए पाइथन का क्रेज बारे जोरों पर है । हैकर भी पाइथन को ही ज्यादा पसंद करते है क्योंकि पाइथन कई मायने में वेबसाइट हैकिंग को आसान बनाता है । अगर आप पाइथन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को अपने कंप्यूटर पर चलना चाहते है तो आप को पहले Python interpreter को अपने computer पर इनस्टॉल करना होगा । Python interpreter को फ्री डाउनलोड करने के लिए https://www.python.org/downloads/ इस वेबसाइट पर जायें और latest version for Windows के निचे बने डाउनलोड बटन पर क्लिक करे ।